PDF · BOOK कर्मभूमी Ó MUNSHI PREMCHAND

TEXT कर्मभूमी

PDF · BOOK कर्मभूमी Ó MUNSHI PREMCHAND Ó ❴Reading❵ ➺ कर्मभूमी Author Munshi Premchand – Helpyouantib.co.uk इस उपन्यास में प्रेमचंद ने देशभक्ति के बारे में बताया है औ?ता समरकांत तथा पत्नी सुखदा को उसका यह निठल्लापन अच्छा नही लगता है। समरकांत एक बड़े व्यापारी हैं और वे उसे धन कमाने को प्रेरित करते हैं पर अमरकांत पिता का अनुचित तरीके से धन कमाने का विरोध करता है। अमरकांत के विचा? Except for Sukhda almost all characters are inconsistent Too much of idealism makes story very boring Story moves here and there or rather there is no plot Totally disappointed

Munshi Premchand Ó कर्मभूमी BOOK

?ों से प्रभावित होकर उसके पिता और उसकी पत्नी सुखदा का ह्र्दय परिवर्तन हो जाता है और वे स्वतंत्रता संग्राम में अमरकांतका साथ देने लगते हैं। हिन्दू धर्म की औपचारिकताओं का पालन करने वाले एक कमजोर युवा आदमी की कहानी? Karmabhumi began really well I absolutely loved the first 60 pages or so The characters were beautiful uirky but not too much the language was simple succinct and beautiful with little metaphors that made my heart happy to readThe characters were all well formed with their own depths and easy to empathize with Be it the protagonist Amarkanth his wife Sukhada or his father Samarkant among others They all fit the context that they were placed in and they behaved realistically They had their weaknesses and strengths just as people do they made mistakes and regretted and rectified the same when they could just as people doSome Beautiful lines from the book“जिन वृक्षों की जड़ें गहरी होती हैं उन्हें बार बार सींचने की जरूरत नहीं होती।”“पुरुष में थोड़ी सी पशुता होती है जिसे वह इरादा करके भी हटा नहीं सकता। वही पशुता उसे पुरुष बनाती है। विकास के क्रम से वह स्त्री से पीछे है। जिस दिन वह पूर्ण विकास को पहुंचेगा वह भी स्त्री हो जाएगा। वात्सल्य स्नेह कोमलता दया इन्हीं आधारों पर यह सृष्टि थमी हुई है और यह स्त्रियों के गुण हैं।”शहरों के बाजारों और गलियों में कितना अंतर है। एक फूल है सुन्दर स्वच्छ सुगंधमय; दूसरी जड़ है कीचड़ और दुर्गन्ध से भरी टेढ़ी मेढ़ी लेकिन क्या फूल को मालूम है की उसकी हस्ती जड़ से है?

TEXT Ö कर्मभूमी Ó Munshi Premchand

कर्मभूमीइस उपन्यास में प्रेमचंद ने देशभक्ति के बारे में बताया है और पोंगापंथी पर बहुत कड़ा प्रहार किया है। अमरकांत शुद्ध खादी पहनता है चर्खा चलाता है और सामाजिक तथा सार्वजनिक कार्यो में बाद चढ़ कर हिस्सा लेता है। उसके प? Read this in my struggle towards getting a better grip on my mother tongueI love Premchand's books for their simplicity of language and characters This book was a big shocker The writing did not feel like Premchand Ji's at all None of the characters were simple Your love and hate towards the characters will surely go vice versa by the endMore than 50% through I couldn't figure what the main plot is aboutInteresting to see a revolutionary plot in a pre independence India which is not about freedom struggle or related revolutionsAt times the content was so heavy that I couldn't continue and needed a lighter read in between There are a lot of idealistic thoughts even valid till date And that's the thing about Premchand evergreenHowever could not enjoy this one as much as I wanted to in spite of reading in a group